Monday, May 6, 2019

रमज़ान का चांद और कुछ सवालः वुसअत का ब्लॉग

आज शाम चांद नज़र आ जाएगा और कल से रमज़ान शुरु हो जाएगा.
सरकारी दफ्तरों में कल तक इसलिए काम नहीं हुआ क्योंकि गर्मी बहुत है. कल से इसलिए नहीं होगा क्योंकि रोज़ा रख के काम कौन करता है.
वैसे तो मैं उपवास भी कह सकता हूं, पर मेरे कई दोस्त बुरा मान सकते हैं. क्योंकि रोज़ा मुसलमान रखते हैं और उपवास हिंदू.
जो रोज़ा रखते हैं वो फास्टिंग नहीं कर सकते, क्योंकि फास्टिंग तो क्रिश्चियन करते हैं.
यूं तो एक साल में 12 चांद होते हैं लेकिन इनमें से 10 चांद जनता देखती है और रमज़ान और ईद के चांद केवल चांद देखने वाली कमेटी को नज़र आते हैं.
1400 वर्ष पहले चूंकि विज्ञान नहीं था इसलिए चांद ज्ञान की मदद से देखा जाता था.
पर आज पहली तारीख़ का चांद किस दिन किस समय नज़र आएगा, उसकी अगले सौ वर्ष तक की जंत्री बनाना संभव है.
इसीलिए भारत और पाकिस्तान को छोड़ कर लगभग हर मुस्लिम देश में रमज़ान और ईद का एक ही चांद नज़र आता है.
और जो व्यक्ति सरकारी चांद से हट कर दूसरा चांद देखने की कोशिश करें, उसे सरकारें दिन में तारे दिखा देती हैं.
वैसे तो चांद देखने का इस्लामी तरीक़ा ये है कि उसे नंगी आंख से दिखाई देना चाहिए, मगर पहली तारीख़ के चांद की उम्र सिर्फ़ बीस-पच्चीस मिनट ही होती है.
पुराने ज़माने में जब इतना प्रदूषण नहीं था तब रेगिस्तान में पहली का चांद हर कोई आसानी से देख सकता था.
पर आज तो धुंए और धूल के कारण चांद तो रहा एक तरफ़, ख़ुद नीला आकाश देखना ही कठिन है.
इसीलिए अब चांद देखने के लिए मौसम विभाग के सांइस चार्ट और विमानों की मदद ले कर ये मसला आसानी से हल हो सकता है.
पर अपने उपमहाद्वीप में उलेमा हज़रात चांद देखने के लिए सिर्फ़ उस हद तक आधुनिक उपकरणों की मदद लेते हैं, जहां तक चांद देखने का उनका हक़ ख़त्म न हो.
उन्हें चांद देखने के लिए किसी ऊंची बिल्डिंग का छत पर अंग्रेज़ की बनाई लिफ्ट के ज़रिए पहुंचने या अंग्रेज़ी दूरबीन के इस्तेमाल में कोई आपत्ति नहीं. पर अंग्रेज़ों के बनाए मौसम विभाग की भविष्यवाणी और चांद के वैज्ञानिक चार्ट पर उनका बिल्कुल भी ऐतबार नहीं.
ऐतबार कर लिया तो फिर चांद देखने के लिए मौलवी हज़रात की ज़रूरत क्या रहेगी?
जहां तक आम नागरिक का मामला है तो उसके लिए चांद देखना बिल्कुल ज़रूरी नहीं.
जिस दिन नींबू दो सौ रूपये किलो की बजाय साढ़े चार सौ रूपये किलो और इफ्तारी के पकौड़ों का बेसन डेढ़ सौ रूपये किलो से उछल के साढ़े तीन सौ रूपये के पायदान पर पहुंच जाए समझिए रमज़ान शुरु हो गया.
यानी रमज़ान उस महीने को कहते हैं जिसमें रोज़ेदार सवाब कमाए और दुकानदार पैसा.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में ख़बर है कि भारतीय सेना ने मेजर लीतुल गोगोई को कड़ी फटकार लगाई है और साथ ही पेंशन के लिए उनकी वरिष्ठता में छह महीने की कटौती कर दी है.
मेजर गोगोई को ये सज़ा कश्मीर में एक स्थानीय लड़की के साथ दोस्ती करने, उसे होटल में लेकर जाने और स्थानीय लोगों से झगड़ा करने का दोषी पाए जाने पर दी गई है.
अभी पिछले महीने ही उनके ख़िलाफ़ कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया पूरी की गई थी.
मेजर गोगोई पहली बार चर्चा में तब आए थे जब साल 2017 में उन्होंने कश्मीरी युवक को ह्यूमन शील्ड यानी मानव ढाल बनाकर सेना की जीप से बांध दिया था.
इसके लिए सेना प्रमुख बिपिन रावत ने उन्हें सम्मानित भी किया था.
अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया लिखता है कि सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच पूरी हो जाने के बाद भी समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया जाएगा.
जस्टिस गोगोई पर उनकी ही एक पूर्व जूनियर ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाएं और उनके ख़िलाफ़ विभागीय जांच चल रही है.
ये जांच सुप्रीम कोर्ट के ही तीन जजों की समिति कर रही है जिसमें जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस इंदिरा बैनर्जी शामिल हैं और जस्टिस बोबड़े समिति की अध्यक्षता कर रहे हैं.
समिति अपनी जांच पूरी होने पर रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों को सौंपेगी लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया जाएगा.

No comments:

Post a Comment