Monday, November 12, 2018

सीवीसी ने सुप्रीम कोर्ट को देर से सौंपी रिपोर्ट, सॉलिसीटर जनरल ने माफी मांगी

बता दें कि रिश्वतखोरी विवाद में सीबीआई प्रमुख वर्मा और जांच एजेंसी में नंबर दो राकेश अस्थाना को 23 अक्तूबर को छुट्टी पर भेज दिया गया था। अस्थाना ने वर्मा पर रिश्वत लेने के आरोप लगाए थे। इसके बाद सीवीसी ने इस मामले की जांच शुरू की थी। 

सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा के खिलाफ सीवीसी जांच की निगरानी के लिए पूर्व जस्टिस एके पटनायक को नियुक्त किया था। कोर्ट ने मामले की जांच दो सप्ताह में पूरी कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। सीबीआई निदेशक वर्मा सीवीसी प्रमुख केवी चौधरी की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय आयोग के समक्ष पेश हो चुके हैं और अपना बयान रिकॉर्ड कराया था। वर्मा अपने ऊपर लगे रिश्वतखोरी के आरोपों से इनकार करते रहे हैं।

कैसे हुई विवाद की शुरुआत

सीबीआई के दोनों अधिकारियों वर्मा और अस्थाना ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। इतना ही नहीं सीबीआई ने अपने नंबर दो के अधिकारी के खिलाफ 15 अक्तूबर को एफआईआर दर्ज की थी। वहीं अस्थाना ने 24 अगस्त को वर्मा के खिलाफ कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा था। कैबिनेट सचिव ने अस्थाना की शिकायत को सीवीसी के पास भेज दिया था। 

अस्थाना की शिकायत के दो महीने बाद सीबीआई ने उनके, सीबीआई डीएसपी देवेंद्र कुमार, मनोज प्रसाद और सोमेश प्रसाद के खिलाफ 15 अक्तूबर को सतीश बाबू के 4 अक्तूबर को दिए बयान के आधार पर एफआईआर दर्ज की थी। अस्थाना ने वर्मा पर हैदराबाद के व्यवसायी सतीश बाबू सना से 2 करोड़ रुपये घूस के तौर पर लेने का आरोप लगाया है। सना से जांच एजेंसी मीट निर्यातक मोईन कुरैशी से संबंधित मामलों में पूछताछ कर रही थी।

सना का दावा है कि उसने पूछताछ से बचने के लिए सीबीआई के विशेष निदेशक अस्थाना को 3 करोड़ रुपये की घूस दी थी। अस्थाना से उनकी डील दो भाईयों सोमेश और मनोज प्रसाद ने करवाई थी। उनका कहना था कि यदि वह 5 करोड़ रुपये दे देगा तो उसे इस मामले से राहत मिल जाएगी। जिसके लिए वह तीन करोड़ रुपये इन भाईयों को दे चुका था। इसके अलावा सना ने दिल्ली में अस्थाना से मुलाकात करने का दावा किया था।अमेरिका ने बांग्लादेश से रोहिंग्या शरणार्थियों की म्यामांर में स्वैच्छिक और सम्मानजनक वापसी की मांग करते हुए कहा कि ढाका को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें तमाम गतिविधियों की स्वतंत्रता हो और वे ‘शिविरों तक ही सीमित ना रहें।’ ढाका और ने पी तौ के बीच पिछले महीने लाखों रोहिंग्या मुस्लिमों की मध्य नवंबर में देश वापसी पर सहमति बनी थी। 
यह रोहिंग्या शरणार्थी म्यामांर सेना के चलाए गए अभियान के बाद देश छोड़कर बांग्लादेश चले गए थे। समझौते के तहत पहले जत्थे में बांग्लादेश से 2,000 रोहिंग्या मुसलमान म्यांमा जाएंगे। इसके बाद दूसरा जत्था रवाना होगा। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने रविवार को एक बयान में कहा कि हमने दोनों सरकारों के उच्च स्तर के अधिकारियों को समय से पहले वापसी को लेकर अपनी गंभीर चिंताओं से अवगत करा दिया है।

इस बात पर जोर दिया गया कि अंतरराष्ट्रीय परिपाटी के अनुरूप स्वैच्छिक, सुरक्षित, और सम्मानित तरीके से वापसी हो। इसके अलावा म्यामां वापसी के बाद उन्हें तमाम गतिविधियों की आजादी हो और वे शिविरों तक ही सीमित ना रहें। साथ ही, विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह संयुक्त राष्ट्र में शरणार्थियों के उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) के उस आकलन से भी सहमत है, जिसमें कहा गया है कि रोहिंग्या शरणार्थियों की वापसी के लिए म्यामां में स्थिति अभी पूरी तरह अनुकूल नहीं है।

Friday, September 14, 2018

सैफी मस्जिद से बोले पीएम मोदी- राष्ट्रभक्ति पर बोहरा समुदाय की भूमिका हमेशा अहम

क्रवार को इंदौर के सैफी मस्जिद पहुंचे प्रधानंमत्री नरेन्द्र मोदी ने बोहरा समुदाय और उसकी राष्ट्रभक्ति को लेकर कई बातें कही। पीएम मोदी ने कहा कि बोहरा समुदाय सबको साथ लेकर चलता है। राष्ट्रभक्ति पर बोहरा समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि बोहरा समुदाय से पुराना रिश्ता रहा है।
ताकत से सबको परिचित करा रहा बोहरा समुदाय
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश के लिए कैसे जीया जाता है यह बोहरा समुदाय ने सिखाया। उन्होंने कहा कि मुझे जन्मदिन के लिए पवित्र मन से आशीर्वाद मिला है। पीएम ने अपने गृह राज्य का जिक्र करते हुए कहा कि गुजरात में हर जगह बोहरा कारोबारी है। उन्होने कहा कि बोहरा समुदाय भारत की ताकत से सबको परिचित करा रहा है।
कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में बोहरा समुदाय की अहम भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में बोहरा समुदाय के चलते ताकत मिली है। कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में बोहरा समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। स्वच्छता के प्रति देश में अभूतपूर्व जागरुकता आई है। उन्होंने कहा कि बोहरा समुदाय के लिए हमेशा मेरे दरवाजे खुले हैं।
इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तय कार्यक्रम के तहत आज शुक्रवार को इंदौर पहुंचे। इस एकदिवसीय प्रवास के दौरान सबसे पहले वे सैफी मस्जिद पहुंचे। मस्जिद में पीएम मोदी ने दाऊदी बोहरा समुदाय के धर्मगुरु सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन से मुलाकात की। प्रधानमंत्री के साथ सीएम शिवराज सिंह चौहान ने भी मुस्लिम धर्मगुरू से मुलाकात की।
हज़रत इमाम हुसैन की शहादत की याद में दाऊदी बोहरा समुदाय द्वारा आयोजित अशर-ए-मुबारका कार्यक्रम में पीएम मोदी के साथ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी शामिल हुए।
इस अवसर पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पीएम मोदी लगातार, बिना रुके देश की तरक्की के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बोहरा समाज ने महिलाओं-बच्चों के लिए बहुत काम किया है। शिवराज सिंह ने कहा कि दाऊदी बोहरा समाज अपनों से प्यार और दूसरों की मदद करने में आगे है। उज्जैन देश के सबसे अच्छे शहरों में से एक है और इसमें दाऊदी बोहरा समाज का काफी महत्वपूर्ण योगदान है।
दाऊदी बोहरा समाज के धर्मगुरु सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन ने कहा कि वतन से मोहब्बत करो, किसी से झगड़ा न करो, अपना शहर साफ रखो और अपना दिल भी साफ रखो।
प्रधानमंत्री का यह प्रवास लगभग एक घंटे 20 मिनट का है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और ड्रोन कैमरे व सीसीटीवी से नजर रखी जा रही है। आधिकारिक तौर पर दी गई जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री विशेष विमान से सुबह 10.35 पर इंदौर विमान तल पर उतरे। जहां से सैफी नगर की मस्जिद पहुंचकर बोहरा समुदाय के धर्मगुरु से मुलाकात की। 
इंदौर के पुलिस उप महानिरीक्षक हरिनारायण चारी मिश्रा ने संवाददाताओं को बताया कि प्रधानमंत्री के प्रवास के मद्देनजर सुरक्षा-व्यवस्था चाकचौबंद है। पुलिस बल की तैनाती के साथ ड्रोन कैमरे और सीसीटीवी भी लगाए गए हैं। इसके अलावा शहर के लोगों को परेशानी न हो, इसको ध्यान में रखकर मार्ग परिवर्तित भी किए गए हैं। 
दाऊदी बोहरा समुदाय के सैयदना 53वें धर्मगुरु हैं, उनके 12 सितंबर से यहां धार्मिक प्रवचन चल रहे हैं। सैयदना पहली बार इंदौर आए हैं, इससे पहले उनका सूरत में आना हुआ था। सैयदना के पिता अपने जीवनकाल में दो बार इंदौर आए थे।