बता दें कि रिश्वतखोरी विवाद में सीबीआई प्रमुख वर्मा और जांच एजेंसी में
नंबर दो राकेश अस्थाना को 23 अक्तूबर को छुट्टी पर भेज दिया गया था।
अस्थाना ने वर्मा पर रिश्वत लेने के आरोप लगाए थे। इसके बाद सीवीसी ने इस
मामले की जांच शुरू की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा के खिलाफ सीवीसी जांच की निगरानी के लिए पूर्व जस्टिस एके पटनायक को नियुक्त किया था। कोर्ट ने मामले की जांच दो सप्ताह में पूरी कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। सीबीआई निदेशक वर्मा सीवीसी प्रमुख केवी चौधरी की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय आयोग के समक्ष पेश हो चुके हैं और अपना बयान रिकॉर्ड कराया था। वर्मा अपने ऊपर लगे रिश्वतखोरी के आरोपों से इनकार करते रहे हैं।
कैसे हुई विवाद की शुरुआत
सीबीआई के दोनों अधिकारियों वर्मा और अस्थाना ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। इतना ही नहीं सीबीआई ने अपने नंबर दो के अधिकारी के खिलाफ 15 अक्तूबर को एफआईआर दर्ज की थी। वहीं अस्थाना ने 24 अगस्त को वर्मा के खिलाफ कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा था। कैबिनेट सचिव ने अस्थाना की शिकायत को सीवीसी के पास भेज दिया था।
अस्थाना की शिकायत के दो महीने बाद सीबीआई ने उनके, सीबीआई डीएसपी देवेंद्र कुमार, मनोज प्रसाद और सोमेश प्रसाद के खिलाफ 15 अक्तूबर को सतीश बाबू के 4 अक्तूबर को दिए बयान के आधार पर एफआईआर दर्ज की थी। अस्थाना ने वर्मा पर हैदराबाद के व्यवसायी सतीश बाबू सना से 2 करोड़ रुपये घूस के तौर पर लेने का आरोप लगाया है। सना से जांच एजेंसी मीट निर्यातक मोईन कुरैशी से संबंधित मामलों में पूछताछ कर रही थी।
सना का दावा है कि उसने पूछताछ से बचने के लिए सीबीआई के विशेष निदेशक अस्थाना को 3 करोड़ रुपये की घूस दी थी। अस्थाना से उनकी डील दो भाईयों सोमेश और मनोज प्रसाद ने करवाई थी। उनका कहना था कि यदि वह 5 करोड़ रुपये दे देगा तो उसे इस मामले से राहत मिल जाएगी। जिसके लिए वह तीन करोड़ रुपये इन भाईयों को दे चुका था। इसके अलावा सना ने दिल्ली में अस्थाना से मुलाकात करने का दावा किया था।अमेरिका ने बांग्लादेश से रोहिंग्या शरणार्थियों की म्यामांर में स्वैच्छिक और सम्मानजनक वापसी की मांग करते हुए कहा कि ढाका को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें तमाम गतिविधियों की स्वतंत्रता हो और वे ‘शिविरों तक ही सीमित ना रहें।’ ढाका और ने पी तौ के बीच पिछले महीने लाखों रोहिंग्या मुस्लिमों की मध्य नवंबर में देश वापसी पर सहमति बनी थी।
यह रोहिंग्या शरणार्थी म्यामांर सेना के चलाए गए अभियान के बाद देश छोड़कर बांग्लादेश चले गए थे। समझौते के तहत पहले जत्थे में बांग्लादेश से 2,000 रोहिंग्या मुसलमान म्यांमा जाएंगे। इसके बाद दूसरा जत्था रवाना होगा। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने रविवार को एक बयान में कहा कि हमने दोनों सरकारों के उच्च स्तर के अधिकारियों को समय से पहले वापसी को लेकर अपनी गंभीर चिंताओं से अवगत करा दिया है।
इस बात पर जोर दिया गया कि अंतरराष्ट्रीय परिपाटी के अनुरूप स्वैच्छिक, सुरक्षित, और सम्मानित तरीके से वापसी हो। इसके अलावा म्यामां वापसी के बाद उन्हें तमाम गतिविधियों की आजादी हो और वे शिविरों तक ही सीमित ना रहें। साथ ही, विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह संयुक्त राष्ट्र में शरणार्थियों के उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) के उस आकलन से भी सहमत है, जिसमें कहा गया है कि रोहिंग्या शरणार्थियों की वापसी के लिए म्यामां में स्थिति अभी पूरी तरह अनुकूल नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा के खिलाफ सीवीसी जांच की निगरानी के लिए पूर्व जस्टिस एके पटनायक को नियुक्त किया था। कोर्ट ने मामले की जांच दो सप्ताह में पूरी कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। सीबीआई निदेशक वर्मा सीवीसी प्रमुख केवी चौधरी की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय आयोग के समक्ष पेश हो चुके हैं और अपना बयान रिकॉर्ड कराया था। वर्मा अपने ऊपर लगे रिश्वतखोरी के आरोपों से इनकार करते रहे हैं।
कैसे हुई विवाद की शुरुआत
सीबीआई के दोनों अधिकारियों वर्मा और अस्थाना ने एक-दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। इतना ही नहीं सीबीआई ने अपने नंबर दो के अधिकारी के खिलाफ 15 अक्तूबर को एफआईआर दर्ज की थी। वहीं अस्थाना ने 24 अगस्त को वर्मा के खिलाफ कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा था। कैबिनेट सचिव ने अस्थाना की शिकायत को सीवीसी के पास भेज दिया था।
अस्थाना की शिकायत के दो महीने बाद सीबीआई ने उनके, सीबीआई डीएसपी देवेंद्र कुमार, मनोज प्रसाद और सोमेश प्रसाद के खिलाफ 15 अक्तूबर को सतीश बाबू के 4 अक्तूबर को दिए बयान के आधार पर एफआईआर दर्ज की थी। अस्थाना ने वर्मा पर हैदराबाद के व्यवसायी सतीश बाबू सना से 2 करोड़ रुपये घूस के तौर पर लेने का आरोप लगाया है। सना से जांच एजेंसी मीट निर्यातक मोईन कुरैशी से संबंधित मामलों में पूछताछ कर रही थी।
सना का दावा है कि उसने पूछताछ से बचने के लिए सीबीआई के विशेष निदेशक अस्थाना को 3 करोड़ रुपये की घूस दी थी। अस्थाना से उनकी डील दो भाईयों सोमेश और मनोज प्रसाद ने करवाई थी। उनका कहना था कि यदि वह 5 करोड़ रुपये दे देगा तो उसे इस मामले से राहत मिल जाएगी। जिसके लिए वह तीन करोड़ रुपये इन भाईयों को दे चुका था। इसके अलावा सना ने दिल्ली में अस्थाना से मुलाकात करने का दावा किया था।अमेरिका ने बांग्लादेश से रोहिंग्या शरणार्थियों की म्यामांर में स्वैच्छिक और सम्मानजनक वापसी की मांग करते हुए कहा कि ढाका को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें तमाम गतिविधियों की स्वतंत्रता हो और वे ‘शिविरों तक ही सीमित ना रहें।’ ढाका और ने पी तौ के बीच पिछले महीने लाखों रोहिंग्या मुस्लिमों की मध्य नवंबर में देश वापसी पर सहमति बनी थी।
यह रोहिंग्या शरणार्थी म्यामांर सेना के चलाए गए अभियान के बाद देश छोड़कर बांग्लादेश चले गए थे। समझौते के तहत पहले जत्थे में बांग्लादेश से 2,000 रोहिंग्या मुसलमान म्यांमा जाएंगे। इसके बाद दूसरा जत्था रवाना होगा। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने रविवार को एक बयान में कहा कि हमने दोनों सरकारों के उच्च स्तर के अधिकारियों को समय से पहले वापसी को लेकर अपनी गंभीर चिंताओं से अवगत करा दिया है।
इस बात पर जोर दिया गया कि अंतरराष्ट्रीय परिपाटी के अनुरूप स्वैच्छिक, सुरक्षित, और सम्मानित तरीके से वापसी हो। इसके अलावा म्यामां वापसी के बाद उन्हें तमाम गतिविधियों की आजादी हो और वे शिविरों तक ही सीमित ना रहें। साथ ही, विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह संयुक्त राष्ट्र में शरणार्थियों के उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) के उस आकलन से भी सहमत है, जिसमें कहा गया है कि रोहिंग्या शरणार्थियों की वापसी के लिए म्यामां में स्थिति अभी पूरी तरह अनुकूल नहीं है।